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शिवनाथ तट पर सबसे बड़ा जैन तीर्थ, यहां है भगवान चंद्रप्रभ की देश की सबसे बड़ी पद्मासन प्रतिमा


दुर्ग. श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल पंचायत द्वारा शिवनाथ नदी तट पर पुष्पवाटिका के करीब करीब 10 एकड़ क्षेत्रफल पर यह नसिया तीर्थ तैयार कराया जा रहा है। यहां मूल नायक के रूप में भगवान चंद्रप्रभ की बिजौरिया राजस्थान के लाल पाषाण से बनी विशाल पद्मासन प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके साथ 11 -11 फीट की पाश्र्वनाथ और मुनि सुव्रतनाथ की प्रतिमा भी होगी। तीर्थ में स्थापना के लिए भगवान चंद्रप्रभ, भगवान पार्श्वतीर्थ और मुनि सुव्रतनाथ की प्रतिमाएं लाकर स्थापित की जा चुकी है। तीर्थ का निर्माण पूरा होने के साथ पंचकल्याणक द्वारा प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी। जैन समाज के मुताबिक नसिया तीर्थ मध्य भारत की प्रथम क्षेत्र है जहाँ भगवान मुनि सुव्रतनाथ की प्रतिमा स्थापित की गई है।


प्रतिमा की यह भी खासियता
श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल पंचायत के संदीप लुहाडिय़ा ने बताया कि यह पद्मासन में भगवान चंद्रप्रभ की देश की सबसे बड़ी प्रतिमा है। बिना दाग वाले एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा निर्माण के लिए पत्थर को तराशने में ही छह माह लग गए। 25 कारीगरों ने इसे तैयार किया है।



मंदिर परिसर मेें समाधि भी
पंचायत के संदीप लुहाडिय़ा ने बताया कि आचार्यों की प्रेरणा से यहां सल्लेखना धारण करने वालों की समाधि भी बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि दुर्ग में मुनि अध्यात्म सागर महाराज और आर्यिका सुनिर्णयमति माताजी की सल्लेखना हो चुकी है। इनकी यहां समाधि बनाई जा रही है। इन समाधियों पर छतरी का निर्माण भी किया जा रहा है।



एक साल में तैयार होगा तीर्थ
नसिया तीर्थ निर्माण समिति के अध्यक्ष राकेश छाबड़ा ने बताते हैं कि आचार्य विद्या सागर महाराज और आचार्य विशुद्ध सागर महाराज की प्रेरणा और मार्गदर्शन में तीर्थ बनाया जा रहा है। श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल पंचायत के संदीप लुहाडिय़ा ने बताया कि तीर्थ का निर्माण पूरा होने पर अभी करीब एक साल का समय और लगेगा। इसके बाद प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराई जाएगी।



पार्श्वतीर्थ की पहले ही ख्याति
जैन तीर्थों में शामिल नगपुरा के पार्श्वतीर्थ के कारण जिले की ख्याति पहले ही देश-विदेश में हैं। माना जाता है कि अपने श्रमण काल में भगवान पार्श्वतीर्थ ने शिवनाथ नदी तट पर साधना की थी। उनसे जुड़े पुरावशेष को सहेजकर यहां विशाल मंदिर का निर्माण किया गया है। जहां देश ही विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में पूरे साल विविध आध्यात्मिक आयोजन का क्रम चलता रहता है।


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