"हाका परवा देहे"
दूसर के देखा सीखी, गाँव म हाका परवा देहे ।
सरकार मुनादी करे नइये, अपवाह फइला देहे ।
कोनो बेटी माई मन ल, तीजा आना जाना नइये ।
पंच,सरपंच,कोटवार, घर घर जाके समझा देहे ।
बेटी मन रद्दा जोहत हे, कब आहि मोरो भाई ।
फोन ऊपर फोन करत हे, जल्दी भेज न दाई ।
बेटी तीजहारिन बर, इसकुल म डेरा लगवा देहे ।
तीजा पोरा गिफट 5000 रुपया दंड करवा देहे ।
गांव के सियान ल एक्कोकनिक लाज नई लागे ।
बाबू पिला मन बर सब छूट हे, कही आये जाये ।
बहु बेटी आहि, संग म कोरोना लाही डर छा गेहे ।
प्रशासनिक आदेश नोहे, तभो रोका छेका लगा देहे ।
सोचे के बात हरे, कतको आदमी भट्टी म मिलत हे ।
नई जाने ताहू मन, संग म बईठ के दारू पियत हे ।
दीदी बहनी मन के तिहार म, ईकर आंखी गढ़ गेहे ।
बहु ल तीजा लेगे बर मत आहि, खबर भेजवा देहे ।
कोनो बोले वाला नइये, पुरुष वर्ग ल आजादी देहे ।
बारा महीना के तिहार म, दाई दीदी ल सजा मिले ।
मायके के सपना देखे रिहिस सब म पानी फेर देहे ।
साइकिल म पोंगा लगा के गांव गांव घुमवा देहे ।
दूसर के देखा सीखी, गाँव म हाका परवा देहे ।
सरकार मुनादी करे नइये, अपवाह फइला देहे ।
कोनो बेटी माई मन ल, तीजा आना जाना नइये ।
पंच,सरपंच,कोटवार, घर घर जाके समझा देहे ।
✍️राज साहू✍️
समोदा,तहसील-आरंग,जिला-रायपुर
6263232143




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