एक दिन में 41,000 से ज्यादा लोगों ने मांगी ‘सोनु सूद’ से मदद
मुंबई: सोनू सूद (Sonu Sood) जितने लोगों की मदद कर रहे हैं, उतने गुना उनसे मदद मांगने वाले बढ़ते जा रहे हैं. कोई इम्मीग्रेशन (Immigration) में मदद मांग रहा है, किसी के पास बहन के ऑपरेशन (Operation) के लिए पैसे नहीं है, किसी का बाढ़ में घर बर्बाद हो गया है, किसी की किताबें बाढ़ के पानी से खराब हो गई हैं, किसी के पास पिता के श्राद्ध के लिए पैसे नहीं है. हर कोई सोनू सूद हैल्पलाइन (Helpline) पर फोन कर रहा है. पहले जहां लॉकडाउन में केवल फंसे हुए लोगों को घर पहुंचाने के लिए उनकी हैल्पलाइन पर फोन आ रहे थे, अब तो ट्विटर, फेसबुक, हैल्पलाइन, ई-मेल, इंस्टाग्राम हर जगह से मदद की गुहार की बारिश हो रही है, सोनू सूद फिर भी हर एक के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनको भी पता है कि सबकी मदद (Help) करना नामुमकिन है.
एक ही दिन में 41,000 से ज्यादा हैल्प मैसेज
एक ही दिन में उनके पास 41,000 से ज्यादा हैल्प मैसेज आए, 1137 ईमेल, 19000 लोगों ने फेसबुक पर मदद मांगी, 4812 ने इंस्टाग्राम पर, 6741 ने ट्विटर के जरिए उनसे गुहार लगाईं अभी इसमें फोन करने वालों की संख्या उन्होंने नहीं दी है. इससे ये तो पता चलता है कि सोनू से मदद मांगने वालों में पढ़े लिखे लोगों की भी कमी नहीं है, यहां तक कि विदेश से भी लोग इम्मीग्रेशन में मदद मांग रहे हैं और देश के किसी भी कौने की बात हो, सोनू इनकार नहीं करते.
1137. mails.19000. fb messages4812. Insta messages6741. twitter messages.Today’s HELP messages.On an average these are the number of requests I get for HELP. It is humanly impossible to reach out to everyone. I still try my best.Apologies if I missed your message🙏— sonu sood (@SonuSood) August 20, 2020
सिस्टम भी हो गया परेशान
सोनू किसी की सर्जरी करवा रहे हैं तो किसी का घर बनवा रहे हैं, किसी को ट्रैक्टर दिलवा रहे हैं तो किसी को कोर्स की किताबें, और उनसे मदद मांगने वाले किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है. ऐसे में आखिर सोनू की मदद की कितनी सीमा होगी? और यही हो रहा है, वो जितने लोगों की मदद कर रहे हैं, उससे ज्यादा अगले दिन मदद मांगने वालों की तादाद बढ़ जाती है. यहां तक कि शायद सोनू के पास मदद मांगने वालों की सच्चाई पता करने का भी शायद कोई मैकेनिज्म नहीं है. अब तो लगता है उनका सिस्टम भी परेशान होने लगा है.
मसीहा बने सोनू
अगर एक दिन में ही 41,000 का औसत होगा, तो सोचिए महीने में उनसे मदद मांगने वाले 12 लाख से ऊपर चले जाएंगे. इन 12 लाख लोगों की मदद की पोस्ट, ई-मेल या एप्लीकेशंस को पढ़ेगा कौन, और कौन उनके सही, गलत के दावों की जांच करेगा? फिर इतने लोगों की मदद करना कोई हंसी खेल तो नहीं? लेकिन आप सोनू सूद का ट्वीट पढ़िए, उन्होंने मना नहीं किया, पूरी कोशिश का दावा किया है. और माफी भी मांगी है अगर वो किसी वजह से आपके मैसेज ना पढ़ पाएं तो



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